Saakhi – Bhai Tara Ji Ki ShahidiSaakhi - Bhai Tara Ji Ki Shahidi

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भाई तारा जी की शहीदी

सतगुरु नानक देव जी के समय बाबर ने ऐमनाबाद पर हमला किया, ऐमनाबाद के और आस-पास के लोगों का धन-माल लूटा, इज्जत लूटी, आम हत्याकांड का हुक्म दे कर ख़ून की नदियाँ बहा दीं। जो बचे, उन को बंदी बना लिया और बाबर ने सारे शहर को आग लगा कर जला देने का हुक्म जारी कर दिया। हर तरफ हाहाकार की आवाजें सुनाई देती थीं। सारा शहर धधकती आग के साथ ज्वालामुखी का रूप धारण कर चुका था।

गुरू नानक देव जी का एक सिक्ख, जिसका नाम इतिहास में भाई तारा लिखा है, वह इस कहर और जलती नगरी को देख, सह न सका। उस ने पानी की मच्छक (एक प्रकार का पानी ढोने का थैला) भरी, जहाँ-जहाँ घर जल रहे थे, वहाँ पहुंच, आग पर पानी डाल कर आग बुझाने के प्रयास करने लगा। यह घर न भाई तारा के थे, न भाई तारा के किसी रिश्तेदार या सज्जन मित्र के थे परन्तु भाई तारे की दृष्टि में सारा संसार ही उसे अपना लग रहा था। संसार की पीड़ा उसे अपनी पीड़ा लगती थी। दूसरों के घरों को लगी आग में उसे अपना घर जलता नजर आ रहा था। वह लगातार दौड़-दौड़ कर मच्छक भर लाता और जलती आग पर डाल देता।

भाई तारा जी ने अभी दो-तीन मच्छकें पानी जलती हुई आग पर डाला था कि बाबर के सिपाहियों ने भाई तारे को पकड़ लिया, मच्छक छीन ली और पूछा तूं यह क्या कर रहा है? भाई तारे ने उत्तर दिया, मैं घरों को लगी हुई आग बुझा रहा हूँ। सिपाहियों ने पूछा, क्या तूं आग बुझा लेगा? भाई तारे ने कहा, इतना तो मैं दावा नहीं कर सकता पर मैं खामोश रह कर इस जल रही आग को भी नहीं देख सकता, क्योंकि मेरे मालिक का मुझे हुक्म है कि जहाँ आग लगी हो, उसको बुझाना मेरा फर्ज है। मैं अपने मालिक का हुक्म बजा कर अपना फर्ज पूरा कर रहा हूँ। सिपाहियों ने कड़क कर कहा तुझे पता नहीं यह आग बाबर के हुक्म से लगाई गई है, इसको कोई बुझा नहीं सकता।

भाई तारे ने बेखौफ और बे-झिझक हो कर उत्तर दिया, ठीक है बाबर और उस के सिपाहियों का काम है आग लगाना, गुरू नानक और गुरू नानक के सिक्खों का फर्ज है लगी हुई आग को बुझाना। भाई तारे का जुर्रत भरा उत्तर सुन कर बाबर के सिपाही क्रोधित हो गए और भाई तारा जी को जलती आग में फैंक कर शहीद कर दिया। भाई तारा जी स्वयं तो आग में जल कर शहीद हो गए परन्तु अनेकों को दूसरों का दु:ख दूर करने और लगी हुई आग को बुझाने की प्रेरणा दे गए।

शिक्षा – हमें हर एक का दु:ख अपना दु:ख लगना चाहिए और हमें इसे दूर करने का प्रयास करना चाहिए।

Waheguru Ji Ka Khalsa Waheguru Ji Ki Fateh
– Bhull Chukk Baksh Deni Ji –

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