Saakhi – Guru Harrai Or Sikh Ka Sawal

Saakhi - Guru Harrai Or Sikh Ka Sawal

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गुरु हरिराय और सिक्ख का सवाल

गुरु हरिराय जी के दरबार में एक बार एक एक सिक्ख आया और पूछा, ‘महाराज ! आपको अपने दोनों पुत्रों में से कौनसा पुत्र अधिक प्रिय है ?’ गुरु जी ने उत्तर दिया, ‘माता पिता को सब बच्चे एक जैसे ही प्यारे होते हैं। मेरे लिए तो मेरे सारे सिक्ख ही मेरे बच्चे हैं और मुझे बहुत प्यारे हैं। पर अगर आपको इन पुत्रों के बारे में ही पता करना है तो वह मैं नहीं कह सकता। मैं आपको एक तरीका बता सकता हूँ। मैं तुम्हे एक सूई देता हूं। इस वक्त दोनों पुत्र पालनों में बैठ पाठ कर रहे हैं। तुम दोनों साहिबजादों का पहले पाठ सुनना, फिर यह सूई उनके पालने के पागे में गाड़ देना, जिसके पागे में यह सूई गड़ जाए समझो वही मुझे ज्यादा प्यारा है।’

वह सिक्ख गुरु जी को सत्य वचन कह कर पहले बाबा रामराय के पालने के पास पहुँचा और कुछ देर पाठ सुनता रहा। बाबा रामराय जी पोथी को पालने पर रख कर पाठ कर रहे थे। कुछ समय पाठ सुनने के बाद उस सिक्ख ने गुरू जी द्वारा दी गई सूई बाबा रामराय के पालने के एक पागे में चुभाई, पर लकड़ी का पागा इतना सख्त था कि सूई तिनका मात्र भी ना गड़ सकी। उसने दुबारा भी कोशिश की, पर सूखी लकड़ी में सूई कैसे गड़ सकती थी ?

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फिर वह सिक्ख बाला गुरु हरिकिृशन जी के पालने पास पहुँचा और पाठ सुनने लगा, पाठ इतनी मीठी सुर में पढ़ा जा रहा था कि सिक्ख मंत्रमुग्ध हो गया और काफी समय तक पाठ की सुनता रहा। फिर उसको गुरु साहिब का आदेश याद आया तो उसने उस सूई को बाबा गुरु के पागे में गड़ाया। वह यह देख कर हैरान रह गया कि पागे की लकड़ी बिल्कुल हरी लकड़ी जैसी हो गई थी और सूई उसमें इस तरह गड़ गई जैसे मोम हो। उसने फिर पागे को हाथ लगा कर देखा, उसको ऐसा लगा कि जैसे पागे की लकड़ी किसे नये उगे पौधे की हो। फिर वह सिक्ख गुरु हरिराय जी पास आ गया और उन्हें सारी बात कह सुनाई।

गुरु जी उसकी बात सुन कर बहुत खुश हुए और कहा, ‘गुरु जी की बाणी को जो सच्चे दिल से पढ़ता है तो सूखे हुए पौधे भी हरे हो जाते हैं। बाल हरिकिृशन इस बाणी को प्रभु से एकचित्त हो कर पढ़ रहा है। इसलिए उसके पालने की सूखी लकड़ी भी हरी हो गई है। पर साहिबजादा रामराय एक नेम पूरा कर रहा है, इसलिए उसकी बाणी का सूखी लकड़ी पर कोई प्रभाव नहीं हुआ। अब मैं समझता हूँ कि तुम्हें तुम्हारे सवाल का जवाब मिल ही गया होगा।’ सिक्ख ने हाँ में सिर हिला कर गुरु जी से विदा ली।

शिक्षा – गुरबाणी पढ़ते वक्त ध्यान ईश्वर की और रखना चाहिए जिससे हमें इसका लाभ मिल सके।

Waheguru Ji Ka Khalsa Waheguru Ji Ki Fateh
– Bhull Chuk Baksh Deni Ji –

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