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Saakhi – Kabul Ki Sangat or Guru Arjan Dev Ji

Saakhi – Kabul Ki Sangat or Guru Arjan Dev JiSaakhi - Kabul Ki Sangat or Guru Arjan Dev Ji

साखी – काबुल की संगत और गुरु अरजन देव जी

गुरु अरजन देव जी के समय एक दिन संगत काबुल (अफगानिस्तान) से गुरुजी के दर्शन के लिए अमृतसर आ रही थी। रास्ते में उन्हें एक सिक्ख और उसकी पत्नी मिले। इस सिक्ख ने संगत की बहुत सेवा की। उसने थकी हुई संगत के पैरों की मालिश की और उनके आराम करने के समय पंखे से हवा भी दी। वह संगत के लिए पानी आदि सबकुछ लाया जिसकी संगत को जरूरत थी। अगले दिन जब संगत अमृतसर के लिए रवाना हुई तो यह सिक्ख और उसकी पत्नी उनके साथ चल दिए। जैसे ही संगत दरबार साहिब पहुंची, काबुल की संगत के जत्थेदार ने कुछ लड़कों को उनके जूतों की देखभाल करने के लिए कहा। लेकिन लड़कों में से कोई भी ऐसा करने के लिए तैयार नहीं था, क्योंकि वे सभी गुरुजी के दर्शन सबसे पहले करने के लिए उत्सुक थे। अंत में रास्ते में संगत के साथ शामिल हुआ सिक्ख आगे आया और कहा कि ‘मैं यह काम करूँगा।’

संगत दरबार साहिब के अंदर गयी और 30-45 मिनट तक इंतजार करती रही लेकिन गुरुजी कहीं दिखाई नहीं दे रहे थे। फिर जत्थेदार ने बाबा बुड्डा जी से पूछा कि गुरुजी कहां हैं ?

बाबाजी- गुरुजी काबुल से आने वाली संगत को देखने गए हैं।

जत्थेदार- लेकिन काबुल की संगत तो हम हैं।

बाबाजी- क्या आप गुरुजी से नहीं मिले ?

जत्थेदार- नहीं बाबाजी, हम नहीं मिले। लेकिन हम एक सिक्ख और उनकी पत्नी से मिले और उन्होंने हमारी बहुत सेवा की।

बाबाजी- वो सिक्ख कहां है ?

जत्थेदार- हम उसे संगत के जूतों की देखभाल करने के लिए बाहर छोड़ आये हैं।

बाबाजी के साथ जत्थेदार और पीछे पूरी संगत उस सिक्ख को देखने के लिए बाहर आ गए। और उस सिक्ख को अपने चोले के साथ सभी जूतों की सफाई करते हुए देखा।

बाबाजी ने देखा यह सिक्ख कोई और नहीं स्वयं गुरु अरजन देव जी ही थे।

बाबा बुड्डा जी आगे बढ़े और जूते की जोड़ी जो गुरुजी साफ कर रहे थे उनसे ले ली। बाबाजी ने कहा, ‘आप यह क्यों कर रहे हैं ?’ यह दृश्य देख पूरी संगत की आँखों में अब आँसू थे लेकिन गुरुजी मुस्कुराए और कहा ‘बाबाजी, मैंने गुरु नानक देव जी को नहीं देखा है, लेकिन आपके देखा है। इस जूती को फिर से देखो। बाबाजी ने जूते की जोड़ी को ध्यान से देखा। चूंकि बाबा जी गुरु नानक देव जी के साथ रहे थे, उन्होंने तुरंत पहचान लिया कि यह गुरु नानक देव जी की जूती की जोड़ी थी।

शिक्षा : गुरुद्वारा में सेवा करते समय, इस विचार से करें कि कौन जानता है कि आज गुरुद्वारा का दौरा कौन कर रहा है। कौन जाने कौनसी गुरुमुख आत्मा आज आ रही हो। यदि आप एक छोटे बच्चे के जूते की सफाई कर रहे हैं, ध्यान रखें कि यह साहिबजादों में से एक का हो सकता है। यदि आप एक बीबी के जोड़ों की सफाई कर रहे हैं, ध्यान रखे कि यह बीबी भानी से संबंधित हो सकता है। अगर आप भाई जी के जूते की सफाई, ध्यान रखें कि यह भाई बैलो से संबंधित हो सकता है।

बाबाणीआ कहाणीआ पुत सपुत करेनि ॥
जि सतिगुर भावै सु मंनि लैनि सेई करम करेनि ॥ (गुरु ग्रंथ साहिब जी – 951)

Waheguru Ji Ka Khalsa Waheguru Ji Ki Fateh

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